डेल्टा वही मध्य तमिल शैली बोलता है जिसके सबसे क़रीब मानक लिखित तमिल है, और इसका मतलब यह है कि यहाँ दिलचस्प भिन्नता भौगोलिक उतनी नहीं जितनी सामाजिक और ऐतिहासिक है। तीन अलग-अलग दरबारी और प्रवासी घटनाएँ अपने पीछे भाषाएँ छोड़ गईं — सोलहवीं सदी का तेलुगुभाषी नायक प्रशासन, 1676 से एक मराठीभाषी भोंसले दरबार, और एक परिक्षेत्र में 1950 के दशक तक चला फ़्रांसीसी प्रशासन — और तीनों आज भी सुनाई देती हैं।
मध्य (डेल्टा की) तमिलद्रविड़, तमिल
वह शैली जिसे स्कूली पढ़ाई और प्रसारण बिना किसी चिह्न वाली मानकर चलते हैं। उसके अपने चिह्न मुख्यतः बाहर के बोलने वालों को सुनाई देते हैं — दूसरे अक्षर में एक भरा-पूरा स्वर, और मदुरै या कोयंबत्तूर की बोली से धीमी अदायगी।
डेल्टा के अग्रहारमों की ब्राह्मण तमिलद्रविड़, तमिल
एक भली-भाँति प्रलेखित सामाजिक बोली, जिसमें नातेदारी के अलग शब्द हैं, अनुष्ठान और खाने के लिए भारी संस्कृत शब्द-भंडार है, और उन दरबारों से उठाए गए मराठी तथा तेलुगु शब्द हैं जिनकी सेवा यह समुदाय करता था। फ़िल्म और टेलीविज़न इसी रूप को कुंभकोणम के संकेत की तरह इस्तेमाल करते हैं।
तंजावुर मराठीभारोपीय-आर्य, मराठी
भोंसले दरबार और उसके अनुचरों के वंशजों की बोली जाने वाली मराठी, जो सत्रहवीं सदी से महाराष्ट्र से कटी हुई है और इसी वजह से पुराने रूप बचाए हुए है, जबकि वाक्य-रचना तमिल से लेती है। यह देवनागरी, मोड़ी और कभी-कभी तमिल लिपि में लिखी जाती है।
बोलने वाले: कुछ दसियों हज़ार, ज़्यादातर बुज़ुर्ग
सौराष्ट्रभारोपीय-आर्य
कुंभकोणम और तंजावुर में तथा और दक्षिण में बसे रेशम बुनने वाले परिवारों की भाषा, जिसे यहाँ वही प्रवास लेकर आया जिसने मदुरै के कपड़ा-व्यापार को गढ़ा।
करैक्काल का फ़्रांसीसी अवशेषरोमांस, सिर्फ़ ऋण-शब्दों में
कोई बोली जाने वाली शैली नहीं, बल्कि एक शब्दावली — प्रशासनिक, क़ानूनी और नगरपालिका के शब्द, जो करैक्काल के रोज़मर्रा के इस्तेमाल में और उस दौर के संपत्ति-अभिलेखों में बचे हुए हैं जब यह परिक्षेत्र पेरिस से शासित था।