मदनपुरा और मुबारकपुर के बनारसी रेशम-बुनकरवाराणसी, आज़मगढ़
हाथ की बुनी कढ़ुआ ब्रोकेड
हो सके तो बुनकर से या किसी सहकारी समिति से ख़रीदिए। साड़ी को उलटकर देखिए — अगर बूटे पीछे धागों पर लटके दिखें, तो वह कढ़ुआ नहीं है।
भोजपुर और पूर्वांचल · Middle & Lower Gangetic Plain
हाथ की बुनी कढ़ुआ ब्रोकेड
हो सके तो बुनकर से या किसी सहकारी समिति से ख़रीदिए। साड़ी को उलटकर देखिए — अगर बूटे पीछे धागों पर लटके दिखें, तो वह कढ़ुआ नहीं है।
कचौड़ी-सब्ज़ी, जलेबी और लौंगलता
सवेरे खुलते हैं और दोपहर से पहले ख़त्म हो जाते हैं; क़तार सात बजे से पहले लग जाती है।
मिट्टी के कुल्हड़ों में गाढ़ी लस्सी
सिर पर रखी परातों से बिकने वाला जाड़े का दूध-झाग
केवल नवंबर से फ़रवरी तक, और सुबह दस बजे तक ख़त्म।
बनारसी पान, सिझाया हुआ और कहे मुताबिक़ मोड़ा हुआ
हाथ से गाँठ लगाए ऊनी और रेशमी क़ालीन
गाँठों की गिनती पूछिए और यह भी कि टुकड़ा करघा-प्रमाणित है या नहीं; इस पट्टी के बाल-श्रम के इतिहास ने ही वे प्रमाणन-व्यवस्थाएँ पैदा कीं जो अब पूरे उद्योग में चलती हैं।
चाँदी जैसे नमूनों से जड़े काली मिट्टी के बर्तन
भोजपुर और पूर्वांचल की मशहूर दुकानें, बाज़ार और कारख़ाने, और हर एक किस चीज़ के लिए जाना जाता है। (7)