नागा पहाड़ियाँ · Northeast Hill Massif
लोग
| नाम | वर्ष | क्षेत्र | किसलिए मशहूर |
|---|---|---|---|
| तेमसुला आओ | 1945–2022 | कवि, कहानीकार और नृवंशविज्ञानी | क्षेत्र की मौखिक परंपरा को अंग्रेज़ी गद्य और पद्य में लिखा, जिसमें "These Hills Called Home" शामिल है, और आओ मौखिक साहित्य का एक नृवंशवैज्ञानिक अध्ययन प्रकाशित किया। 2007 में पद्मश्री और 2013 में साहित्य अकादेमी पुरस्कार मिला। |
| ईस्टरीन किरे | जन्म 1959 | उपन्यासकार और कवि | अंग्रेज़ी में पहला नागा उपन्यास "A Naga Village Remembered" प्रकाशित किया, जो खोनोमा के इतिहास पर टिका है, और "When the River Sleeps" के लिए 2015 में हिंदू पुरस्कार जीता। अंगामी गाँव-समाज में जाने का प्रमुख साहित्यिक रास्ता उनका ही काम है। |
| तालीमेरेन आओ | 1918–1998 | फ़ुटबॉलर और चिकित्सक | 1948 के लंदन ओलंपिक खेलों में भारत की कप्तानी की और उसके बाद असम तथा नगालैंड में चिकित्सा की। कोहिमा का स्टेडियम और स्थानीय खेल की एक पूरी पीढ़ी उनके नाम पर है। |
| माचिहान सासा | — | कुम्हार | उखरुल के नुंगबी गाँवों के लोंगपी मिट्टी-शिल्प के तांगखुल उस्ताद, जिन्होंने बिना चाक वाली सर्पेंटिनाइट-और-मिट्टी की तकनीक को चलता रखा और एक पीढ़ी को उसमें प्रशिक्षित किया। 2024 में पद्मश्री से सम्मानित। |
| मोआ सुबोंग | — | संगीतकार और वाद्य-निर्माता | आओ संगीतकार, जिन्होंने बामहम बनाया, एक बाँस का फूँक वाद्य जिसे उसमें गुनगुनाकर बजाया जाता है — यह इस क्षेत्र के वाद्य-परिवार से कुछ जाने का नहीं, उसमें कुछ नया आने का दुर्लभ उदाहरण है। |
| तेत्सियो बहनें | — | संगीतकार | फेक की चाखेसांग बहनें, जो ताती सारंगी के साथ चोकरी लोकगीत-भंडार ली गाती हैं, और जो इस रूप को उसकी भाषा से बाहर अनूदित किए बिना रिकॉर्डिंग और राष्ट्रीय मंचों तक ले गईं। |
| चेक्रोवोलू स्वूरो | — | तीरंदाज़ | चाखेसांग तीरंदाज़, जिन्होंने 2012 के ओलंपिक खेलों में भारत के लिए हिस्सा लिया — क्षेत्र की पारंपरिक धनुष-संस्कृति एक आधुनिक प्रतिस्पर्धी विधा में बदल गई। |
| एडविन डब्ल्यू. क्लार्क | 1830–1913 | मिशनरी और भाषाविद् | अमेरिकी बैपटिस्ट, जो 1870 के दशक में आओ पहाड़ियों में बस गए और आओ में पहली छपी हुई सामग्री तैयार की, जिसमें एक शब्दकोश भी शामिल था। प्रेस के लिए चुंगली क़िस्म चुनने की वजह से ही वह आओ की साहित्यिक मानक बनी। |
| जे. एच. हटन और जे. पी. मिल्स | 1885–1968; 1890–1960 | प्रशासक-नृवंशविज्ञानी | उन्होंने वह मोनोग्राफ़-शृंखला लिखी — "The Angami Nagas", "The Sema Nagas", "The Lhota Nagas", "The Ao Nagas", "The Rengma Nagas" — जो ईसाई-पूर्व गाँव-व्यवस्था का आज भी सबसे सघन अकेला अभिलेख है। वे औपनिवेशिक दस्तावेज़ हैं और उसी तरह पढ़े जाते हैं, पर उनके ब्योरे की बराबरी उसके बाद किसी ने नहीं की। |
नागा पहाड़ियाँ के वे लोग जिन्होंने यहाँ के इतिहास, कला, विज्ञान, खेल और सार्वजनिक जीवन को गढ़ा। (9)