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मलाबार · Western Coastal Strip

लोग

नामवर्षक्षेत्रकिसलिए मशहूर
ज़ैनुद्दीन मख़दूम द्वितीयलगभग 1532–1583विद्वत्ता और इतिहासपोन्नानी में पढ़ाया और तुहफ़त अल-मुजाहिदीन लिखी, जो इस तट का और उस पर पुर्तगालियों का अरबी में लिखा विवरण है — भारत के किसी हिस्से का वहीं रहने वाले किसी व्यक्ति द्वारा लिखा गया सबसे आरंभिक इतिहास।
कुंहालि मरक्कार चतुर्थनिधन 1600नौसैनिक नेतृत्वमरक्कार नौसेनापतियों में अंतिम, जिन्होंने सोलहवीं सदी के अधिकांश समय पुर्तगालियों के विरुद्ध ज़ामोरिन के बेड़े की कमान सँभाली और बड़े जहाज़ों के मुक़ाबले छोटे तेज़ पोतों का इस्तेमाल किया। ज़ामोरिन के साथ गठबंधन टूटने के बाद 1600 में उन्हें मृत्युदंड दिया गया।
कोझिकोड के क़ाज़ी मुहम्मदलगभग 1548–1616कविता और धार्मिक विद्वत्ता1607 में मुह्यिद्दीन माला की रचना की — अरबी-मलयालम में बची हुई सबसे पुरानी कृति, और एक ऐसी लिपि में लिखित साहित्य की शुरुआत जिसने मलयालम को दूसरा पाठक-वर्ग दिया।
हरमन गुंडर्ट1814–1893कोशकारिता और मुद्रणतलश्शेरी के पास इल्लिक्कुन्नु में बासेल मिशन के विद्वान, जिन्होंने 1847 में पहला मलयालम अख़बार राज्यसमाचारम छापा, मलयालम का एक आरंभिक व्याकरण लिखा, और 1872 में छपा वह मलयालम–अंग्रेज़ी शब्दकोश तैयार किया जिस पर बाद की मलयालम कोशकारिता खड़ी है।
कीलेरि कुंहिकण्णन1858–1939सर्कसतलश्शेरी के एक कलरी गुरु, जिन्होंने 1901 में देश का पहला सर्कस प्रशिक्षण स्कूल खोला और कलरिपयट्टु की शरीर-साधना को कलाबाज़ी पर लागू किया। अगली एक सदी तक भारतीय सर्कस के अधिकांश पेशेवर अपने कलाकारों की जड़ें इसी तट में खोजते रहे।
ओ. चंदु मेनन1847–1899साहित्यमलाबार के एक मजिस्ट्रेट, जिन्होंने 1889 में इंदुलेखा लिखी — मलयालम का पहला बड़ा उपन्यास, जो एक मातृवंशीय घर में रखा गया है और उसी के भीतर से उस पर बहस करता है।
मोयिनकुट्टि वैद्यर1852–1892कविताकोंडोट्टि के, मापिला पाट्टु के प्रमुख कवि; उनका 1872 का बदरुल मुनीर–हुस्नुल जमाल इस रूप का सबसे प्रसिद्ध प्रेमकाव्य है, और वही वजह हैं कि मापिला पद्य को लोकसाहित्य नहीं, साहित्य माना जाता है।
के. केलप्पन1889–1971सार्वजनिक जीवनकोयिलांडि के पास जन्म; 1931–32 में मंदिर-प्रवेश के लिए गुरुवायूर सत्याग्रह का नेतृत्व किया और केरल के मंदिर-प्रवेश तथा समाज सुधार अभियानों की केंद्रीय शख़्सियत रहे।
ए. के. गोपालन1904–1977राजनीतिकण्णूर के; एक अध्यापक, जो लोकसभा में पहले नेता प्रतिपक्ष बने, और स्वतंत्र भारत में निवारक नज़रबंदी पर सबसे आरंभिक संवैधानिक मुक़दमे के साथ जिनका नाम जुड़ा है।
एस. के. पोट्टेक्काट1913–1982साहित्यकोझिकोड के उपन्यासकार और यात्रा-लेखक, जिन्हें 1980 में ओरु देशत्तिन्ते कथा के लिए ज्ञानपीठ मिला — एक ऐसा उपन्यास जो असल में उनके अपने शहर की एक ही सड़क की जीवनी है। उनकी प्रतिमा उसी सड़क पर खड़ी है।
पुनत्तिल कुंजब्दुल्ला1940–2017साहित्यवडकर के एक डॉक्टर, जिनकी स्मारकशिलकल ने एक मापिला घर का भीतरी जीवन मुख्यधारा की मलयालम कथा-भूमि में ला खड़ा किया।
एम. मुकुंदनजन्म 1942साहित्यमाहे में जन्म; मय्यझिप्पुझयुडे तीरंगलिल में उस अंतःक्षेत्र को मलयालम साहित्य में लिखा — मलाबार के भीतर बसे एक फ़्रांसीसी क़स्बे का उपन्यास, और 1954 में उसके साथ जो हुआ उसका।
पी. टी. उषाजन्म 1964एथलेटिक्सकोझिकोड ज़िले के पय्योलि की; 1984 के ओलंपिक में 400 मी बाधा दौड़ का फ़ाइनल दौड़ीं और सौवें सेकंड से चौथे स्थान पर रहीं, और फिर इसी तट पर एक प्रशिक्षण स्कूल खड़ा किया जिसने अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों की एक पूरी क़तार दी।

मलाबार के वे लोग जिन्होंने यहाँ के इतिहास, कला, विज्ञान, खेल और सार्वजनिक जीवन को गढ़ा। (13)