कोरापुट–कालाहांडी उच्चभूमि · Central Highlands & Forest Belt
त्योहार
| त्योहार | कब | क्या होता है |
|---|---|---|
| चैता परब | चैत्र, मार्च–अप्रैल | देसिया साल का सबसे बड़ा त्योहार — उच्चभूमि के समुदायों में फैला एक वसंत-पर्व, जिसमें सामूहिक शिकार, नए महुए और आम का पहला भोग, गाँव के धरती-थान पर चढ़ावे और कई दिनों का धेमसा सब मिले हुए हैं। गाँव का काम रुक जाता है; तारीख़ दिसारी तय करता है। |
| जयपोर का दशहरा | आश्विन, सितंबर–अक्टूबर | पुराने जयपोर दरबार का दस दिन का दुर्गा-पर्व, जो कनक दुर्गा मंदिर के इर्द-गिर्द केंद्रित है, जिसमें जुलूस, रात के बाज़ार और एक मेला होता है जो पूरे पठार को क़स्बे में खींच लाता है। शक्ल में यह दरबारी त्योहार है और व्यवहार में बाज़ार का। |
| छतर जात्रा, भवानीपटना | आश्विन, दशहरे पर | छतर — मणिकेश्वरी का प्रतीक वह अनुष्ठानिक छत्र — रात में मंदिर से जेना खाल के मैदान तक ले जाया जाता है और वापस लाया जाता है, पूरे रास्ते घुमुरा बजता रहता है और क़स्बा उसके लिए जागता रहता है। |
| नुआखाई | भाद्रपद शुक्ल पंचमी, अगस्त–सितंबर | कोसली बोलने वाली पश्चिमी पट्टी का नए चावल का त्योहार, जिसका दिन हर साल पंचांग से तय होता है। यह मुख्यतः संबलपुर और बोलांगीर का पर्व है और इस क्षेत्र तक बोलांगीर के निचले मैदान तथा कालाहांडी के मैदानों के रास्ते पहुँचता है — उच्चभूमि के गाँवों तक नहीं, जहाँ साल का पहला अनाज मोटा अनाज है और साल इसके बजाय चैता परब पर पलटता है। |
| पुष पुनेइ | पौष पूर्णिमा, दिसंबर–जनवरी | उच्चभूमि का जाड़े का फ़सल-पर्व — घर में पकाया गया नया अनाज, गाँव के थान पर चढ़ावे, और साल के सबसे भरे बाज़ार, जो तब लगते हैं जब बखार सबसे ऊँचे होते हैं और काम सबसे कम। |
| करमा पूजा | भाद्रपद शुक्ल एकादशी, अगस्त–सितंबर | करम पेड़ की एक डाल काटी जाती है, भीतर लाई जाती है और आँगन में गाड़ दी जाती है; बहनें व्रत रखती हैं, रात उसके चारों ओर नाचते हुए बीतती है, और भोर को डाल बहा दी जाती है। यह छोटा नागपुर और छत्तीसगढ़ के मैदानों के साथ साझा है। |
| बिहन पूजा और बुवाई के संस्कार | बैसाख से आषाढ़, अप्रैल–जुलाई | बीज बाहर निकाला जाता है, धरती-थान पर चढ़ाया जाता है और तभी बोया जाता है जब गाँव का पुजारी पहले बो चुका हो। क्रम — कौन-सी फ़सल, कौन-सा खेत, कौन-सा दिन — दिसारी तय करता है और वह एक-दूसरे से कुछ ही किलोमीटर दूर के गाँवों में अलग-अलग होता है। |
| परब, कोरापुट | नवंबर की शुरुआत | उच्चभूमि के नृत्य, हस्तशिल्प और खान-पान का एक ज़िला-स्तर पर आयोजित उत्सव, जो कोरापुट में कई दिनों तक चलता है। यह कोई पुराना संस्कार नहीं, एक आधुनिक मंच है, और यही वह इकलौता मौक़ा है जब पूरे पठार के रूप अगल-बग़ल प्रस्तुत होते हैं। |
कोरापुट–कालाहांडी उच्चभूमि का त्योहार कैलेंडर — क्या मनाया जाता है, कब पड़ता है और क्या होता है। (8)