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ब्रज · Upper Indus–Gangetic Plain

लोकगीत

रसियाब्रजभाषा

राधा और कृष्ण की छेड़छाड़, रूठना और मनाना, जो उत्तम पुरुष में और अक्सर बेबाक ढंग से गाया जाता है। बरसाना और नंदगाँव के होली रसिया दोनों क़स्बों के बीच प्रतिस्पर्धा में गाए जाते हैं।

कब गाया जाता है: होली, राधाष्टमी, और साल भर गाँव के जमावड़े.

समाज गायन के पदब्रजभाषा

अष्टछाप और हरिदासी कवियों की भक्ति-पदावली, जो ध्रुपद से निकली शैली में सामूहिक रूप से गाई जाती है।

कब गाया जाता है: वृंदावन की मंदिर-सभाएँ.

होरीब्रजभाषा

रंग-क्रीड़ा एक शृंगारिक रूपक के रूप में। यह वह विधा है जो इस क्षेत्र से पूरी तरह बाहर निकल गई — बनारस और लखनऊ में गाई जाने वाली शास्त्रीय होरी-ठुमरी यही भंडार है।

कब गाया जाता है: होली-चक्र के चालीस दिन.

मल्हार और झूला के गीतब्रजभाषा

झूले, बारिश और विरह, जो मंदिरों में ठाकुर जी को झुलाते समय गाए जाते हैं।

कब गाया जाता है: सावन.

सांझी के गीतब्रजभाषा

सांझी के चित्र बनाते समय लड़कियों द्वारा गाए जाने वाले गीत, जो राधा को एक बालिका के रूप में संबोधित करते हैं।

कब गाया जाता है: पितृ पक्ष, जब स्टेंसिल बनाए जा रहे होते हैं.

भेंट और जागरणब्रजभाषा और हिंदी

देवी और कृष्ण के लिए रात भर चलने वाला भक्ति-गायन, जिसका भंडार हरियाणा और राजस्थान के साथ साझा है।

कब गाया जाता है: रात के जागरण.

ब्रज के लोकगीत — किस बारे में हैं, कौन गाता है और कब। (6)