मगध · Middle & Lower Gangetic Plain
त्योहार
| त्योहार | कब | क्या होता है |
|---|---|---|
| पितृ पक्ष मेला | आश्विन का कृष्ण पक्ष (सितंबर–अक्टूबर), सत्रह दिन | भारत के हर हिस्से से और प्रवासी समाज से लोग गया के पचास के आसपास अनुष्ठान-स्थलों पर अपने पितरों के लिए पिंडदान करने आते हैं। यह दुनिया के सबसे बड़े पितृ-कर्म जमावड़ों में से एक है, और गयावाल पुरोहित परिवार सदियों से इसे तीर्थयात्रियों के मूल क्षेत्र के हिसाब से व्यवस्थित करते आए हैं। |
| छठ | कार्तिक (अक्टूबर–नवंबर) और चैत (मार्च–अप्रैल) | सूर्य को अर्घ्य देने और उपवास के चार दिन, जिनमें भोर और साँझ को पानी में खड़े होकर अर्घ्य दिया जाता है। औरंगाबाद का देव सूर्य-मंदिर और पटना के गंगा घाट इस क्षेत्र के सबसे बड़े जमावड़े देखते हैं। |
| बुद्ध पूर्णिमा | वैशाख (अप्रैल–मई) | यह एक ही दिन बुद्ध के जन्म, ज्ञान-लाभ और महापरिनिर्वाण, तीनों को चिह्नित करती है। बोधगया में रात भर अनुष्ठान चलता है और सारे विहार एक साथ जुलूस निकालते हैं। |
| राजगीर मलमास मेला | अधिक मास में, हर तीसरे साल, महीने भर | अतिरिक्त चंद्र मास में लगता है, जब कहा जाता है कि सारे तीर्थों के देवता राजगीर में आ बसते हैं। गरम सोतों के आसपास महीने भर चलने वाला मेला, जिसमें लाखों लोग आते हैं। |
| पावापुरी में महावीर जयंती | चैत (मार्च–अप्रैल), और निर्वाण के अनुष्ठान के लिए दीवाली | जैन महावीर का जन्म बसंत में मनाते हैं, और पावापुरी में उनका निर्वाण दीवाली की रात — इसी से इस त्योहार का जैन अर्थ निकला है। |
| मख़दूम शरफ़ुद्दीन याह्या मनेरी का उर्स | शव्वाल, चंद्र पंचांग | बिहार शरीफ़ की बड़ी दरगाह पर पाँच दिन, क़व्वाली, लंगर और एक मेले के साथ। |
| राजगीर महोत्सव | जाड़ा | राजगीर की पहाड़ियों के प्राकृतिक रंगशाला-नुमा घेरे में होने वाला राज्य का नृत्य और संगीत उत्सव। |
| मकर संक्रांति | 14 या 15 जनवरी | पूरे क्षेत्र में दही-चूड़ा, तिलकुट और तिल-गुड़ खाया जाता है, नदी के घाटों पर मेले लगते हैं और पटना में पतंगें उड़ती हैं। |
मगध का त्योहार कैलेंडर — क्या मनाया जाता है, कब पड़ता है और क्या होता है। (8)