इस समूह के क्षेत्रों में कांगड़ा अपवाद है। 1846 के बाद वह रियासत नहीं, ब्रिटिश पंजाब का एक साधारण ज़िला था, जहाँ कलेक्टर, भूमि-बंदोबस्त और छावनी थी, जिसका मतलब यह था कि उसके पास सीधे विरोध करने के लिए कुछ था और उसे करने के लिए राष्ट्रीय आंदोलन की सामान्य मशीनरी भी — ज़िला कांग्रेस समितियाँ, सम्मेलन, सविनय अवज्ञा, भारत छोड़ो की गिरफ़्तारियाँ। यही वजह है कि उसका प्रतिरोध का रिकॉर्ड चंबा या मंडी के रिकॉर्ड से अलग दिखता है, जहाँ राजनीति को पहले किसी राजा की ओर तानना पड़ता था। इसके दो प्रसंग इस सबसे पहले के हैं: ख़ुद अधिग्रहण के ख़िलाफ़ 1848 में नूरपुर के इलाके का विद्रोह, और 1857 में पड़ोसी कुल्लू में विद्रोह की कोशिश के नेताओं को धर्मशाला में दी गई फाँसियाँ। यहाँ की बीसवीं सदी की लड़ाई सबसे बेहतर बाबा कांशी राम के ज़रिए याद की जाती है, जिन्होंने उर्दू या अंग्रेज़ी के बजाय पहाड़ी भाषा में काम किया और उन गाँवों तक पहुँचे जहाँ कोई छपा पर्चा नहीं पहुँचा।
नूरपुर का विद्रोह1848
पहाड़ों के अधिग्रहण के बाद की गड़बड़ी में राम सिंह पठानिया ने ख़ुद को नूरपुर का वज़ीर घोषित किया और आसपास के इलाके को खड़ा किया, शाहपुर कंडी का क़िला लेकर अपने पास रखा और रावी के इलाके में कई मुठभेड़ें लड़ीं।
परिणाम: धोखा दिए जाने के बाद वे 1848 में पकड़े गए, लाहौर में एक सैन्य अदालत ने उन पर मुक़दमा चलाया और उन्हें रंगून भेज दिया गया, जहाँ नवंबर 1849 में पच्चीस साल की उम्र में उनका निधन हुआ। ख़ुद लड़ाई के वृत्तांत स्रोतों के बीच काफ़ी अलग-अलग हैं।
1857 की धर्मशाला की फाँसियाँ3 अगस्त 1857
कुल्लू में विद्रोह की जो कोशिश प्रताप सिंह ने सराज के इलाके के समर्थन से की, उसे कुचल दिया गया और उसके नेताओं को मुक़दमे के लिए ज़िला मुख्यालय धर्मशाला लाया गया।
परिणाम: प्रताप सिंह और वीर सिंह को 3 अगस्त 1857 को धर्मशाला में फाँसी दी गई। ख़ुद कांगड़ा ज़िला नहीं उठा।
कांगड़ा ज़िले में कांग्रेस का संगठन1920–1942
ब्रिटिश पंजाब का हिस्सा होने के नाते कांगड़ा में ज़िला कांग्रेस समितियाँ, राजनीतिक सम्मेलन और असहयोग, सविनय अवज्ञा तथा भारत छोड़ो का पूरा सिलसिला था। 1927 में सुजानपुर टीरा में एक सम्मेलन तितर-बितर कर दिया गया और उसमें शामिल लोगों को चोटें आईं।
परिणाम: 1930 और 1940 के दशकों में बार-बार गिरफ़्तारियाँ; इस क्षेत्र का यही अकेला हिस्सा है जिसका स्वतंत्रता-आंदोलन का रिकॉर्ड सीधे प्रशासित क़िस्म का है।