धोती और बंडीपुरुष
सादी सफ़ेद या हल्की मटमैली धोती, छोटी बिन बाँह की जैकेट और कंधे पर गमछा, और खेत के काम के लिए धोती ऊपर खोंस ली जाती है।
किस मौके पर: रोज़मर्रा
बघेलखंड · Central Highlands & Forest Belt
पठार पर पहनावा उत्तर भारत का मानक देहाती जोड़ा है — मर्दों के लिए धोती, बंडी और साफ़ा, स्त्रियों के लिए साड़ी या लहँगा-ओढ़नी — और जंगली ज़िलों में वह साफ़ तौर पर बदल जाता है, जहाँ गोंड और कोल स्त्रियाँ चलने-फिरने की सहूलियत के लिए बिना पेटीकोट बाँधी गई छोटी सूती साड़ी पहनती हैं, और सोने के बजाय भारी चाँदी। बघेलखंड के पास अपनी कोई दरबारी वस्त्र-परंपरा नहीं है: रीवा दरबार अपने रेशम बनारस और चंदेरी से ख़रीदकर मँगाता था, और यही वजह है कि इस क्षेत्र की भौतिक पहचान कपड़े में नहीं, धातु, पत्थर और जंगल की उपज में बैठती है।
क्या पहना जाता है
सादी सफ़ेद या हल्की मटमैली धोती, छोटी बिन बाँह की जैकेट और कंधे पर गमछा, और खेत के काम के लिए धोती ऊपर खोंस ली जाती है।
किस मौके पर: रोज़मर्रा
बुंदेली साफ़े से नीचा और चपटा बाँधा जाने वाला साफ़ा, आमतौर पर सफ़ेद या केसरिया। आदिवासी गाँवों में उसकी जगह अक्सर लपेटा हुआ सादा कपड़ा या तह किया हुआ गमछा ले लेता है।
किस मौके पर: शादियाँ और मेले
मोटे तौर पर छह से आठ हाथ की एक छोटी सूती साड़ी, जो बिना पेटीकोट टख़ने से ऊपर बाँधी जाती है और कंधे पर गाँठ लगाकर कसी जाती है, जिससे जंगल के काम और बोझ ढोने के लिए टाँगें खुली रहती हैं। यह काम का कपड़ा है, और उसकी लंबाई ही उसका काम का ब्योरा है।
किस मौके पर: रोज़मर्रा
छपे सूती कपड़े का घाघरा, कसी हुई चोली और सिर का लंबा कपड़ा, और बड़े-बुज़ुर्गों के सामने ओढ़नी आगे खींच ली जाती है। बघेली ढंग से बाँधने पर घाघरा बुंदेली ढंग के मुक़ाबले ज़्यादा दिखता है।
किस मौके पर: रोज़मर्रा और त्योहार
पल्लू दाहिने कंधे से होते हुए सिर पर ले लिया जाता है और कमर में खोंस दिया जाता है, ताकि दोनों हाथ खुले रहें।
किस मौके पर: रोज़मर्रा, पठार और क़स्बा
बुनाई और कपड़े
बचे हुए छोटे समूह, जो स्थानीय बिक्री के लिए सादा सूती थान, गमछे और चादरें बुनते हैं। साधारण, बिना दर्ज हुआ और सिकुड़ता हुआ; इसमें से किसी पर कोई संरक्षित नाम नहीं लगा है।
टसर के कोए जंगली ज़िलों के साल और अर्जुन पर पाले और लपेटे जाते हैं, पर सूत लगभग पूरा कहीं और बुना जाता है — छत्तीसगढ़ में और भागलपुर में। यह क्षेत्र रेशा पैदा करता है और क़ीमत बाहर भेज देता है, ठीक वही ढर्रा जो उसके कोयले का है और बग़ल में उसके हीरों का।
गहने
बघेलखंड का पारंपरिक पहनावा — कपड़े, हथकरघा बुनाई, जीआई टैग वाले वस्त्र और गहने। (7)