पटकाई और तिरप पट्टी · Eastern Himalaya & Brahmaputra Belt
लोग
| नाम | वर्ष | क्षेत्र | किसलिए मशहूर |
|---|---|---|---|
| बनवांग लोसू | — | शिक्षक और लिपि-निर्माता | लोंगडिंग ज़िले के एक स्कूल शिक्षक, जिन्होंने 2001 और 2012 के बीच वांचो के लिए एक वर्णमाला गढ़ी, और वह भी किसी मौजूदा लिपि से नहीं, अपने ही गाँव की बोली की ध्वनियों से काम करते हुए। मार्च 2019 में उसे यूनिकोड के संस्करण 12.0 में स्वीकार कर लिया गया, जिससे वांचो दुनिया की उन बहुत थोड़ी-सी भाषाओं में आ जाती है जिन्हें एक ही जीवनकाल के भीतर ख़ास तौर पर बनाई गई लिपि और अंतरराष्ट्रीय एन्कोडिंग मिली हो। रोज़मर्रा के वांचो बरताव में यह लिपि रोमन की जगह ले पाएगी या नहीं, यह अब भी खुला सवाल है। |
| लाखुम मोस्सांग | — | लिपि-निर्माता | तांगसा के लिए एक लिपि गढ़ी — एक ऐसे भाषा-गुच्छे के लिए जिसमें लगभग तीस रूप हैं और जिसकी अपनी कोई लेखन-प्रणाली नहीं थी — और इस तरह उन रूपों के लिए एक ही वर्तनी-व्यवस्था की समस्या को सँभाला जो हमेशा आपस में समझ में नहीं आते। तांगसा लिपि 2021 में यूनिकोड के संस्करण 14.0 में दर्ज की गई। |
| बिसा गाम | — | सिंगफो मुखिया | वह सिंगफो मुखिया, जिन्होंने 1823 में व्यापारी रॉबर्ट ब्रूस को उस चाय के नमूने दिए जिसे समुदाय बहुत पहले से उगा और पका रहा था। अगले ही साल ब्रूस की मृत्यु हो गई और उनके भाई चार्ल्स एलेक्ज़ेंडर ब्रूस ने काम आगे बढ़ाया; असम का चाय उद्योग, और आख़िरकार भारत का, उसी लेन-देन से निकला है। जिस समुदाय ने पौधा दिया, उसे उसके बाद जो हुआ उसमें से लगभग कुछ नहीं मिला। |
| जेम्स लोवांगचा वांगलात | — | राजनीति | तिरप से; 1977 में पीपुल्स पार्टी ऑफ़ अरुणाचल प्रदेश की स्थापना की, जो राज्य की पहली क्षेत्रीय राजनीतिक पार्टी थी, 1974 में आपातकाल-कालीन निवारक निरोध के तहत हिरासत में लिए गए, और बाद में राज्य में मंत्री रहे। उनका जीवन-वृत्त सीमांत ज़िलों के अपना राजनीतिक प्रतिनिधित्व पाने के बजाय ख़ुद गढ़ने की सबसे साफ़ मिसाल है। |
| स्टीफ़न मोरी | — | भाषाविज्ञान | वह भाषाविद, जिनके तांगसा, सिंगफो और ताई समुदायों के साथ लंबे समय तक चले क्षेत्र-कार्य ने तांगसा रूपों का और विहु गीत-परंपरा का सबसे पूरा उपलब्ध अभिलेख तैयार किया, जिसका बड़ा हिस्सा समुदाय के लोगों के साथ मिलकर बना और बरतने लायक़ रिकॉर्डिंग तथा पाठ के रूप में समुदायों को लौटाया गया। |
पटकाई और तिरप पट्टी के वे लोग जिन्होंने यहाँ के इतिहास, कला, विज्ञान, खेल और सार्वजनिक जीवन को गढ़ा। (5)