मिज़ो–कुकी–चिन पहाड़ियाँ · Northeast Hill Massif
लोग
| नाम | वर्ष | क्षेत्र | किसलिए मशहूर |
|---|---|---|---|
| जेम्स हर्बर्ट लॉरेन | 1870–1946 | मिशनरी और कोशकार | एफ़. डब्ल्यू. सैविज के साथ मिलकर 1894 में मिज़ो को रोमन वर्णमाला में उतारा, 1896 में पहला प्राइमर छापा, और डिक्शनरी ऑफ़ द लुशाई लैंग्वेज तैयार की — वह संदर्भ-ग्रंथ जो पुरानी शब्दावली के लिए आज भी देखा जाता है। |
| फ़्रेडरिक विलियम सैविज | 1862–1935 | मिशनरी और भाषाविद | 1894 की वर्तनी-व्यवस्था में और उसके बाद के व्याकरण तथा कोश के काम में लॉरेन के साथी। किसी भारतीय लिपि के बजाय एक छोटी ध्वन्यात्मक वर्णमाला चुनने का फ़ैसला ही वह वजह है जिससे मिज़ो साक्षरता इतनी तेज़ी से फैली। |
| डेविड एवान जोन्स | 1870–1947 | वेल्श प्रेस्बिटेरियन मिशनरी | मिज़ो में ज़ोसाफ़्लुइया के नाम से जाने गए; 1897 में लुशाई पहाड़ियों में काम शुरू किया और वह स्कूल तथा गिरजाघर का जाल खड़ा किया जिसके ज़रिए नई वर्णमाला गाँवों तक पहुँची। वेल्श कड़ी ही वह वजह है कि किसी वाद्य-परंपरा के बजाय भजन-गायन क्षेत्र का प्रमुख संगीत-व्यवहार बना। |
| लियांगखाइया | 1884–1979 | इतिहासकार और पादरी | मिज़ो चनचिन लिखा, जो किसी मिज़ो द्वारा लिखा गया मिज़ो लोगों का पहला बड़ा इतिहास था, और जिसमें उन्होंने वे कुल-वंशावलियाँ तथा प्रवास के ब्योरे इकट्ठे किए जो वरना मौखिक ही रह जाते। |
| ह्मुआकी | — | रचनाकार, मौखिक परंपरा में | मिज़ो गीत की एक आरंभिक स्त्री रचनाकार के रूप में याद की जाती हैं, और एक जानी-मानी लोक-कथा की नायिका, जो अपने ही समुदाय द्वारा चुप करा दी गई एक गायिका के बारे में है। यह आख्यान अभिलेख नहीं, लोककथा है, पर यही वह कहानी है जो परंपरा अपने और अपने गीतकारों के बारे में कहती है। |
| जेरेमी लालरिनुंगा | जन्म 2002 | भारोत्तोलन | आइजोल से; 2018 के यूथ ओलंपिक खेलों में और 2022 के राष्ट्रमंडल खेलों में 67 किग्रा वर्ग में स्वर्ण जीता। |
| लालरेमसियामी | जन्म 2000 | हॉकी | कोलासिब से; भारत की महिला टीम की फ़ॉरवर्ड, जिन्हें 2019 में एफ़आईएच राइज़िंग स्टार ऑफ़ द ईयर चुना गया — इस बात के सबसे साफ़ निशानों में से एक कि इस क्षेत्र का खेल-जाल उससे कितना आगे तक पहुँचता है। |
| जेजे लालपेखलुआ | जन्म 1991 | फ़ुटबॉल | भारत की राष्ट्रीय टीम के स्ट्राइकर और मिज़ोरम के सबसे ज़्यादा मैच खेलने वाले खिलाड़ियों में से एक। फ़ुटबॉल इस क्षेत्र का जन-खेल है, और 2017 में आइजोल एफ़सी का राष्ट्रीय लीग ख़िताब तीन लाख से कम आबादी वाले शहर के एक क्लब ने जीता था। |
| रोचुंगा पुडाइते | 1927–2015 | अनुवाद और प्रकाशन | मणिपुर की पहाड़ियों के एक ह्मार, जिन्होंने न्यू टेस्टामेंट का ह्मार में अनुवाद किया और अपना जीवन धर्मग्रंथ बाँटने में बिताया। उनका कामकाजी जीवन एक ही ज़िंदगी में इस क्षेत्र का पूरा साँचा है — यहाँ की लिखित संस्कृति के लिए सबसे ज़्यादा मायने रखने वाले लोग अनुवादक और संकलक थे, और यही वजह है कि कुछ हज़ार बोलने वालों वाली किसी कुकी-चिन भाषा के पास भी अपनी वर्तनी-व्यवस्था, अपनी भजन-पुस्तिका और अपना छापाख़ाना है। |
मिज़ो–कुकी–चिन पहाड़ियाँ के वे लोग जिन्होंने यहाँ के इतिहास, कला, विज्ञान, खेल और सार्वजनिक जीवन को गढ़ा। (9)