गारो पहाड़ियाँ · Northeast Hill Massif
लोग
| नाम | वर्ष | क्षेत्र | किसलिए मशहूर |
|---|---|---|---|
| पा तोगान नेंगमिंजा सांगमा | मृत्यु 1872 | प्रतिरोध-नायक | गारो पहाड़ियों के विलय के दौरान 12 दिसंबर 1872 को चिसोबिब्रा में एक छोटी टोली के साथ ब्रिटिश शिविर पर रात का हमला किया और मारे गए। वे गारो ऐतिहासिक स्मृति के केंद्रीय व्यक्ति हैं और यह तारीख़ हर साल मनाई जाती है। |
| सोनाराम आर. सांगमा | — | भूमि-अधिकार अभियानकर्ता | बीसवीं सदी के आरंभ में आकिंग की ज़मीनों में औपनिवेशिक दख़लंदाज़ी के ख़िलाफ़ गारो पक्ष को हथियारों से नहीं, अर्ज़ियों और मुक़दमों के ज़रिए आगे बढ़ाया — तोगान सांगमा के प्रतिरोध का क़ानूनी प्रतिरूप, और यही वजह है कि आकिंग व्यवस्था आधुनिक भू-अभिलेख तक बच पाई। |
| रामके वात्रे मोमिन और ओमेद वात्रे मोमिन | — | शिक्षक | पहले गारो ईसाई, जिन्होंने 1860 के दशक से पहाड़ियों में स्कूल खोले और आचिक को रोमन लिपि में उतारने पर काम किया। मिशन के बारे में कोई जो भी राय रखे, गारो के पास लिखित रूप और एक साक्षर जनता इन्हीं की वजह से है। |
| विलियमसन ए. सांगमा | 1919–1990 | सार्वजनिक जीवन | एक अलग पहाड़ी राज्य के लंबे अभियान का नेतृत्व किया और 1972 में मेघालय बनने पर उसके पहले मुख्यमंत्री बने। |
| पूर्णो ए. सांगमा | 1947–2016 | सार्वजनिक जीवन | गारो पहाड़ियों से; 1990 के दशक में लोकसभा अध्यक्ष रहे, और यह पद सँभालने वाले पूर्वोत्तर के पहले व्यक्ति। |
| मिल्टन एस. सांगमा | — | इतिहासकार | गारो लोगों और इन पहाड़ियों के मानक विद्वत्तापूर्ण इतिहास लिखे, और मौखिक, औपनिवेशिक तथा प्रशासनिक अभिलेख को एक ही आख्यान में पिरोया, जो समुदाय के भीतर से तैयार हुआ। |
गारो पहाड़ियाँ के वे लोग जिन्होंने यहाँ के इतिहास, कला, विज्ञान, खेल और सार्वजनिक जीवन को गढ़ा। (6)