ब्रह्मपुत्र घाटी · Eastern Himalaya & Brahmaputra Belt
त्योहार
| त्योहार | कब | क्या होता है |
|---|---|---|
| रंगाली (बहाग) बिहू | अप्रैल का मध्य, सात दिन | असमिया नववर्ष और वसंत उत्सव — बिहू नृत्य, हुसरी मंडलियाँ, बड़ों को नए गामोसा भेंट, और पहला दिन पूरी तरह गाय-बैलों के नाम, जिन्हें नहलाया, माला पहनाई और खिलाया जाता है। |
| माघ (भोगाली) बिहू | जनवरी का मध्य | फ़सल का भोज। बाँस और फूस के अस्थायी मेजी और भेलाघर ढाँचे बनाए जाते हैं, रात भर उनमें दावत होती है और भोर में उन्हें जला दिया जाता है; कुछ ज़िलों में भैंसों की लड़ाई और अंडों की लड़ाई भी होती है। |
| काती (कंगाली) बिहू | अक्टूबर का मध्य | कठोर संयम वाला बिहू — अन्न-भंडार ख़ाली है और फ़सल अभी खेत में है, इसलिए तुलसी के पौधे के पास और धान में दीये जलाकर रक्षा की प्रार्थना की जाती है। कोई दावत नहीं। |
| अंबुबाची मेला | जून, चार दिन | कामाख्या में, देवी के वार्षिक रजोदर्शन का प्रतीक। मंदिर तीन दिन बंद रहता है और फिर विशाल भीड़ के लिए खुलता है, जिसमें बड़ी संख्या में ऐसे साधु आते हैं जो केवल इसी के लिए प्रकट होते हैं। |
| मे-दाम-मे-फी | 31 जनवरी | पूर्वजों की पूजा का अहोम उत्सव, जो समुदाय और राजवंश के दिवंगतों का सम्मान करता है। |
| अली-आइ-लिगांग | फ़रवरी | मिसिंग समुदाय का वसंत-बुवाई उत्सव — इस नाम का अर्थ है बीज, फल और बुवाई — जिसमें गुमराग नृत्य, अपोंग और सूअर का माँस होता है। |
| जोनबील मेला | जनवरी, माघ बिहू पर | मरिगाँव में तीन दिन का मेला, जहाँ पहाड़ी और मैदानी समुदाय आज भी पैसे के बजाय वस्तु-विनिमय से व्यापार करते हैं, और एक तिवा राजा अनुष्ठानपूर्वक कर वसूलता है। |
| रास महोत्सव, माजुली | नवंबर | द्वीप के सत्रों में कई दिनों तक कृष्ण-कथा की भाओना प्रस्तुतियाँ, जो माजुली में इतने आगंतुक खींच लाती हैं जितने वहाँ और कभी नहीं आते। |
ब्रह्मपुत्र घाटी का त्योहार कैलेंडर — क्या मनाया जाता है, कब पड़ता है और क्या होता है। (8)