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ब्रह्मपुत्र घाटी · Eastern Himalaya & Brahmaputra Belt

व्यंजन

असमिया रसोई शेष भारत की तुलना में जान-बूझकर तेल और मसाले में हल्की है, और उबालने, भाप देने, ख़मीर उठाने तथा मसलने पर टिकी है। पूरा भोजन प्रायः दो विपरीत छोरों के बीच बँधा होता है — यह खार, एक क्षार, से शुरू होता है और टेंगा, एक खट्टे, पर ख़त्म होता है। बाक़ी काम बाँस का कोंपल, सरसों, मछली और स्थानीय जड़ी-बूटियाँ कर देती हैं।

खार (Khar)খাৰशाकाहारी और मांसाहारीपहला कोर्स

यह किसी एक व्यंजन से ज़्यादा एक श्रेणी है। धूप में सुखाए केले के छिलके की राख से पानी छानकर एक क्षारीय अर्क बनाया जाता है, जिसे फिर कच्चे पपीते, दालों या मछली के साथ पकाया जाता है। इसी से भोजन शुरू होता है और यह भारत में और कहीं नहीं मिलता।

मासोर टेंगा (Masor tenga)मांसाहारीअंतिम कोर्स

टमाटर, नींबू, हाथी सेब (औ टेंगा) या थेकेरा से खट्टी की गई एक हल्की खट्टी मछली की तरी। तेल लगभग नहीं, मिर्च का चूर्ण नहीं, और इसी पर भोजन ख़त्म होता है।

कहाँ चखें: गुवाहाटी या जोरहाट का कोई भी असमिया थाली रेस्तराँ।

आलू पिटिका (Aloo pitika)शाकाहारी

उबले आलू को कच्चे सरसों के तेल, कटे प्याज़, हरी मिर्च और धनिये के साथ हाथ से मसला जाता है। थाली की सबसे सादी चीज़, और अक्सर वही जिसकी कमी लोग यहाँ से जाने के बाद सबसे ज़्यादा महसूस करते हैं।

हाँहर मांगख़ो (Hanhor mangxo, पेठे के साथ बत्तख़)मांसाहारी

बत्तख़ को पेठे या सफ़ेद कद्दू और साबुत मसालों के साथ धीमी आँच पर पकाया जाता है — एक उत्सवी व्यंजन, ख़ासकर माघ बिहू और काली पूजा पर।

बाँस के कोंपल के साथ सूअर का माँसमांसाहारी

सूअर का माँस ख़मीर उठाए बाँस के कोंपल (खरिसा) और अक्सर भूत जोलोकिया के साथ पकाया जाता है। यह मैदानी हिंदू रसोई की तुलना में मिसिंग, बोडो और पहाड़ी समुदायों से अधिक जुड़ा है।

ख़ाक भाजी (Xaak bhaji)शाकाहारी

यह किसी व्यंजन से ज़्यादा एक श्रेणी है — दर्जनों पत्तेदार साग, जिनमें से कई जंगल से चुने जाते हैं, लहसुन के साथ सादगी से पकाए जाते हैं। घरों में ऐसे सागों के नाम और भेद बताए जाते हैं जो अधिकांश भारतीय बाज़ारों में कभी बिके ही नहीं।

पइता भात (Poita bhat)शाकाहारी

चावल को रात भर पानी में भिगोया जाता है ताकि उसमें हल्का ख़मीर उठे, और अगली सुबह उसे सरसों के तेल, प्याज़, मिर्च और पिटिका के साथ खाया जाता है। गर्मियों का भोजन, और बहाग बिहू की सुबह का पारंपरिक नाश्ता।

तिल पीठा (Til pitha)शाकाहारीमीठा

बोरा (चिपचिपे) चावल के आटे की एक लिपटी हुई परत, जो गरम तवे पर बिना तेल के सेंकी जाती है और काले तिल तथा गुड़ से भरी जाती है। माघ बिहू के लिए बड़ी मात्रा में बनाई जाती है।

सुंगा पीठा (Sunga pitha)शाकाहारीमीठा

चिपचिपे चावल को हरे बाँस की नली में आग पर भाप दिया जाता है, जिससे चावल में बाँस की सुगंध उतर आती है। नली चीरकर इसे मलाई या गुड़ के साथ खाया जाता है।

खरिसा और खारली (Khorisa, Kharoli)शाकाहारी

ख़मीर उठाया बाँस का कोंपल, और ख़मीर उठाई सरसों के बीज की पिट्ठी — ये दो ख़मीर असमिया भोजन को उसकी अधिकांश धार देते हैं, और दोनों थोड़ी-थोड़ी मात्रा में साथ के रूप में परोसे जाते हैं।

असम चायशाकाहारीपेय

यह एक अलग क़िस्म, Camellia sinensis var. assamica, से उगाई जाती है, जिसे 1820 के दशक में यहाँ जंगली उगते हुए खोजा गया था। अधिकांश भारतीय चाय में जाने वाली माल्ट जैसी सीटीसी बहुत हद तक इसी घाटी से आती है।

कहाँ चखें: जोरहाट या डिब्रूगढ़ का कोई बाग़ान बंगला, जहाँ यह बिना दूध के फ़र्स्ट फ़्लश के रूप में परोसी जाती है।

मुख्य आहार

जोहा चावल (सुगंधित)बोरा चावल (चिपचिपा)मीठे पानी की मछलीसरसों का तेलबाँस का कोंपलखारहाथी सेब (औ टेंगा)भूत जोलोकियाकाला तिल

मिठाइयाँ

तिल पीठाघिला पीठानारिकल लारुतिल लारुपायखचिरा और गुड़ के साथ दैकाजी नेमु संदेश

स्ट्रीट फ़ूड

जलपान (चिरादैगुड़ और पीठा)आलू के साथ लुचीमोमोमछली फ़्राईघुगनीअसमिया थाली

पेय

असम चायअपोंग (मिसिंग चावल की बियर)ज़ू / सुजेन (बोडो चावल की बियर)काजी नेमु शरबतनाहरफूल चाय

ब्रह्मपुत्र घाटी का खानपान — ख़ास व्यंजन, मुख्य आहार, मिठाइयाँ, स्ट्रीट फ़ूड और उन्हें कहाँ चखें। (11)