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कोच्चि और मध्य केरल · Western Coastal Strip

बोली और मौखिक परंपरा

एक भाषा, चार लिपियाँ। मलयालम अपनी ही लिपि में लिखी जाती है, लेकिन यही भाषा मापिला मुसलमानों ने अरबी लिपि में, सीरियन ईसाइयों ने सिरियक लिपि में और कोच्चि के यहूदियों ने हिब्रू लिपि में लिखी — ये तीनों समुदाय इतने पुराने हैं कि उनके धार्मिक भाषा-रूप इस भाषा के इतिहास का हिस्सा हैं, कोई उधार नहीं।

बोलियाँ

मलयालम (मध्य क्षेत्र का रूप)द्रविड़, दक्षिणी

त्रिशूर–एर्णाकुलम का वह रूप जो प्रसारण की मानक भाषा बन गया। औपचारिक प्रयोग में इसमें संस्कृत शब्दावली भारी मात्रा में बनी हुई है, जबकि बोलचाल की शब्दावली पूरी तरह अलग है।

बोलने वाले: दुनिया भर में लगभग 3.5 करोड़

अरबी-मलयालमअरबी लिपि में मलयालम

सदियों तक मापिला साहित्य का लिखित माध्यम, जिसमें मलयालम की उन ध्वनियों के लिए अतिरिक्त अक्षर गढ़े गए जो अरबी में नहीं हैं। धार्मिक ग्रंथों और मापिला पाट्टु के बोलों के लिए आज भी इस्तेमाल होती है।

सुरियानी मलयालमसिरियक लिपि में मलयालम

कर्शोनी — पूर्वी सिरियक अक्षरों में लिखी गई मलयालम, जिसे सेंट थॉमस ईसाई बीसवीं सदी तक धर्म-विधि और दस्तावेज़ रखने के लिए काम में लाते रहे।

यहूदी-मलयालममलयालम, यहूदी रूप

कोच्चि के यहूदियों की बोली, जिसमें हिब्रू और अरामी से आए शब्द तथा स्त्रियों की एक अलग गीत परंपरा है। अपने बोलने वालों के साथ यह व्यावहारिक रूप से इसराइल चली गई।

बोलने वाले: सौ से भी कम

स्थानीय शब्दावली

शब्दअर्थ
Kudampuli കുടംപുളിगार्सीनिया गम्मी-गुट्टा, जिसे धुएँ में सुखाकर मछली करी में खटाई के लिए डाला जाता है। यह इमली का विकल्प नहीं है — इसका अम्ल अधिक गहरा और धुएँ वाला होता है।
Kavu കാവ്किसी देवालय से जुड़ा पवित्र उपवन, जिसे कभी काटा नहीं जाता। व्यवहार में यह इस तट की सबसे पुरानी संरक्षण-संस्था है।
Veedu വീട്घर — पर नाम वाला घर, जो पीढ़ियों से चला आता है और अक्सर उपनाम की जगह इस्तेमाल होता है।
Thattukada തട്ടുകടसड़क किनारे की वह खाने की गाड़ी जो अँधेरा होने के बाद चलती है; यह अपने आप में एक अलग पाकशैली है, रेस्तराँ के खाने का घटिया रूप नहीं।
Ularthiyathu ഉലർത്തിയത്इतना सूखा भूना हुआ कि नमी का नामोनिशान न बचे — यह पकने की एक अवस्था है, कोई व्यंजन नहीं।
Sadya സദ്യकेले के पत्ते पर परोसा जाने वाला भोज, जिसमें हर चीज़ का क्रम और पत्ते पर उसकी जगह तय होती है।
Chundan vallam ചുണ്ടൻ വള്ളംसर्पनौका — 100 फ़ुट से लंबी, जिस पर लगभग सौ नाविक होते हैं, और जो किसी व्यक्ति की नहीं बल्कि पूरे गाँव की होती है।

कहावतें

कहावतशाब्दिक अर्थअर्थ
ആന വായിൽ അമ്പഴങ്ങहाथी के मुँह में एक अंबाड़ाइतनी थोड़ी मात्रा कि गिनने लायक़ ही नहीं।
कडलिनु अप्पुरम करा उंडु (Kadalinu appuram kara undu)समुद्र के उस पार भी ज़मीन हैयह उस तट पर कहा जाता है जिसने पचास साल से खाड़ी देशों में मज़दूर भेजे हैं — कोई और जगह हमेशा होती है।
एल्लाम मंगल्यम (Ellam mangalyam)सब कुछ मंगलमय हैऐसी बहस बंद करने के लिए कहा गया कंधे उचकाना, जिसे कोई जीतने वाला नहीं है।

कोच्चि और मध्य केरल की बोलियाँ, स्थानीय शब्दावली और कहावतें। (10)