एक भाषा, चार लिपियाँ। मलयालम अपनी ही लिपि में लिखी जाती है, लेकिन यही भाषा मापिला मुसलमानों ने अरबी लिपि में, सीरियन ईसाइयों ने सिरियक लिपि में और कोच्चि के यहूदियों ने हिब्रू लिपि में लिखी — ये तीनों समुदाय इतने पुराने हैं कि उनके धार्मिक भाषा-रूप इस भाषा के इतिहास का हिस्सा हैं, कोई उधार नहीं।
मलयालम (मध्य क्षेत्र का रूप)द्रविड़, दक्षिणी
त्रिशूर–एर्णाकुलम का वह रूप जो प्रसारण की मानक भाषा बन गया। औपचारिक प्रयोग में इसमें संस्कृत शब्दावली भारी मात्रा में बनी हुई है, जबकि बोलचाल की शब्दावली पूरी तरह अलग है।
बोलने वाले: दुनिया भर में लगभग 3.5 करोड़
अरबी-मलयालमअरबी लिपि में मलयालम
सदियों तक मापिला साहित्य का लिखित माध्यम, जिसमें मलयालम की उन ध्वनियों के लिए अतिरिक्त अक्षर गढ़े गए जो अरबी में नहीं हैं। धार्मिक ग्रंथों और मापिला पाट्टु के बोलों के लिए आज भी इस्तेमाल होती है।
सुरियानी मलयालमसिरियक लिपि में मलयालम
कर्शोनी — पूर्वी सिरियक अक्षरों में लिखी गई मलयालम, जिसे सेंट थॉमस ईसाई बीसवीं सदी तक धर्म-विधि और दस्तावेज़ रखने के लिए काम में लाते रहे।
यहूदी-मलयालममलयालम, यहूदी रूप
कोच्चि के यहूदियों की बोली, जिसमें हिब्रू और अरामी से आए शब्द तथा स्त्रियों की एक अलग गीत परंपरा है। अपने बोलने वालों के साथ यह व्यावहारिक रूप से इसराइल चली गई।
बोलने वाले: सौ से भी कम